whatsapp button

Talk to us?

Support Astrological Services / ज्योतिषीय सेवाओं का समर्थन करें

Your contribution helps us keep this platform running. / आपका योगदान इस मंच को चलाने में हमारी मदद करता है।

Blog Single

Recent Posts

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जन्म कुंडली व्यक्ति की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर तैयार की जाती है। इससे ग्रहों की स्थिति, राशि, लग्न, नक्षत्र, दशा और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे करियर, विवाह, धन और शिक्षा के बारे में ज्योतिषीय जानकारी प्राप्त की जाती है।

दैनिक राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेतों पर आधारित होता है और मुख्य रूप से राशि के आधार पर दिन की संभावित परिस्थितियों के बारे में जानकारी देता है। व्यक्तिगत और अधिक विस्तृत विश्लेषण के लिए जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर जन्म कुंडली का अध्ययन अधिक विशिष्ट माना जाता है।

विवाह से पहले कुंडली मिलान पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में वर-वधू की कुंडलियों की संगति देखने के लिए किया जाता है। इसमें अष्टकूट गुण मिलान के साथ नाड़ी, भकूट और अन्य ज्योतिषीय कारकों का अध्ययन किया जा सकता है। इसे विवाह से जुड़े निर्णय में एक ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

Social Share

August 31, 2026

मंदिर में परिक्रमा दाईं ओर से क्यों करते हैं? जानिए किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा होती है

जब हम मंदिर में भगवान के दर्शन करने जाते हैं, तो पूजा के बाद अक्सर उनकी परिक्रमा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान की परिक्रमा दाईं ओर से ही क्यों की जाती है? और क्या सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा की संख्या एक जैसी होती है?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में प्रदक्षिणा का विशेष महत्व माना गया है। अलग-अलग देवी-देवताओं और पूजा-पद्धतियों में परिक्रमा की संख्या और नियम अलग हो सकते हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ रोचक और कम ज्ञात बातें।

परिक्रमा और प्रदक्षिणा में क्या अंतर है?

किसी पवित्र स्थान, देवी-देवता या धार्मिक वस्तु के चारों ओर श्रद्धापूर्वक घूमने को सामान्य रूप से परिक्रमा कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे प्रदक्षिणा भी कहा जाता है।प्रदक्षिणा करते समय सामान्य रूप से भगवान को अपने दाहिनी ओर रखा जाता है। इसका भाव यह माना जाता है कि भक्त के जीवन में ईश्वर सर्वोच्च और केंद्र स्थान पर हैं।

भगवान की परिक्रमा दाईं ओर से क्यों करते हैं?

धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान की प्रदक्षिणा करते समय उन्हें अपने दाहिनी ओर रखना शुभ माना जाता है। इसे श्रद्धा, सम्मान और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।जब भक्त भगवान के चारों ओर घूमता है, तो इसका आध्यात्मिक भाव यह माना जाता है कि हमारा जीवन ईश्वर के चारों ओर केंद्रित है। हालांकि अलग-अलग मंदिरों और संप्रदायों में परिक्रमा की विधि अलग हो सकती है।

किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा की जाती है? 

धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए अलग संख्या बताई जाती है। प्रचलित परंपराओं में निम्न संख्याएँ देखने को मिलती हैं:


भगवान विष्णु की परिक्रमा

भगवान विष्णु की पूजा में कई परंपराओं में 4 प्रदक्षिणा करने की मान्यता मिलती है। चार संख्या को धार्मिक रूप से चार दिशाओं और जीवन के विभिन्न पक्षों से जोड़ा जाता है।

माता दुर्गा की परिक्रमा

माता दुर्गा या देवी की पूजा में 1 परिक्रमा की प्रचलित मान्यता मिलती है। हालांकि देवी के अलग-अलग स्वरूपों और मंदिरों में पूजा की परंपरा अलग हो सकती है।

भगवान शिव की परिक्रमा

भगवान शिव के शिवलिंग की प्रदक्षिणा से जुड़े विशेष नियम हैं। कई परंपराओं में शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने की मान्यता है। इसका मुख्य कारण शिवलिंग की जलहरी या सोमसूत्र से जुड़ी धार्मिक परंपरा मानी जाती है। कई स्थानों पर जलहरी को पार नहीं किया जाता।इसलिए शिव मंदिर में परिक्रमा करते समय वहां की स्थानीय परंपरा का पालन करना चाहिए।

भगवान गणेश की परिक्रमा

भगवान गणेश की 3 परिक्रमा करने की मान्यता कई पूजा-पद्धतियों में मिलती है। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और शुभारंभ का देवता माना जाता है।सूर्य देव की परिक्रमा 

सूर्य देव की उपासना में 7 परिक्रमा की प्रचलित मान्यता मिलती है। हिंदू धार्मिक परंपरा में सूर्य देव के साथ सात संख्या का विशेष संबंध माना जाता है।

पीपल के पेड़ की परिक्रमा

पीपल वृक्ष की पूजा में 7, 11 या 108 परिक्रमा करने की मान्यताएँ अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती हैं। पीपल को भारतीय धार्मिक परंपरा में पवित्र वृक्ष माना गया है।

तुलसी माता की परिक्रमा 


तुलसी के पौधे की पूजा में 3, 5 या 7 परिक्रमा करने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।

क्या परिक्रमा की संख्या का कोई वैज्ञानिक नियम है?

नहीं। परिक्रमा की संख्या मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और मंदिरों में इसके नियम अलग हो सकते हैं।

इसलिए इंटरनेट पर बताई गई किसी एक संख्या को सभी मंदिरों के लिए अनिवार्य नियम नहीं मानना चाहिए।

परिक्रमा करते समय इन बातों का ध्यान रखें

परिक्रमा हमेशा श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए।

भगवान को सामान्यतः अपनी दाईं ओर रखें।

मंदिर की स्थानीय परंपरा का पालन करें।

भीड़ में दूसरों को असुविधा न दें।

तेज गति से परिक्रमा करने के बजाय श्रद्धापूर्वक करें।

शिवलिंग की प्रदक्षिणा में जलहरी से जुड़े स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।

मंदिर के पुजारी द्वारा बताए गए विशेष नियमों का सम्मान करें।

परिक्रमा का असली आध्यात्मिक अर्थ

परिक्रमा केवल मंदिर के चारों ओर घूमने की क्रिया नहीं है। इसका सबसे सुंदर आध्यात्मिक भाव यह माना जाता है कि ईश्वर हमारे जीवन के केंद्र हैं।

जब भक्त भगवान की प्रदक्षिणा करता है, तो वह प्रतीकात्मक रूप से अपने अहंकार को पीछे रखकर ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करता है।

निष्कर्ष

मंदिर में परिक्रमा करना हिंदू धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सामान्य रूप से भगवान को दाईं ओर रखकर प्रदक्षिणा करने की परंपरा मिलती है, लेकिन अलग-अलग देवी-देवताओं और मंदिरों में परिक्रमा की संख्या तथा नियम अलग हो सकते हैं।भगवान विष्णु, माता दुर्गा, भगवान शिव, गणेश जी और सूर्य देव की परिक्रमा से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएँ प्रचलित हैं। इसलिए किसी विशेष मंदिर में वहां की परंपरा को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए।

अगली बार जब आप मंदिर में परिक्रमा करें, तो केवल एक धार्मिक रस्म के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर श्रद्धा और शांत मन से प्रदक्षिणा करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: भगवान की परिक्रमा किस दिशा में करनी चाहिए?

उत्तर: सामान्य धार्मिक परंपरा में भगवान को दाईं ओर रखते हुए प्रदक्षिणा करने की मान्यता है।

प्रश्न: भगवान गणेश की कितनी परिक्रमा की जाती है?

उत्तर: कई पूजा-पद्धतियों में गणेश जी की 3 परिक्रमा करने की मान्यता है।

प्रश्न: भगवान शिव की आधी परिक्रमा क्यों की जाती है?

उत्तर: कई परंपराओं में शिवलिंग की जलहरी या सोमसूत्र को पार न करने के कारण आधी प्रदक्षिणा की जाती है।

प्रश्न: सूर्य देव की कितनी परिक्रमा की जाती है?

उत्तर: सूर्य उपासना में 7 परिक्रमा की प्रचलित धार्मिक मान्यता मिलती है।

प्रश्न: क्या सभी मंदिरों में परिक्रमा का नियम समान होता है?

उत्तर: नहीं। अलग-अलग मंदिरों, क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Comments Stream (0)

No comments yet. Be the first to reply!