September 06, 2026
भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत हिंदू धर्म में सबसे पवित्र व्रतों में गिना जाता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है, जिसे कई जगहों पर अन्नदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी बहुत से भक्तों के मन में एक सवाल है—अजा एकादशी 6 सितंबर को है या 7 सितंबर को? आइए पंचांग के अनुसार सही तारीख, पूजा विधि और इस व्रत की पूरी जानकारी विस्तार से जानते हैं।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम करीब 7:29 बजे शुरू होकर 7 सितंबर की शाम लगभग 5:04 बजे तक रहेगी। चूंकि एकादशी व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि मौजूद हो, इसलिए अजा एकादशी व्रत सोमवार, 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस साल यह व्रत सोमवार के दिन पड़ने से भगवान विष्णु की भक्ति के साथ भगवान शिव की आराधना का भी विशेष संयोग बन रहा है।
पारण (व्रत खोलने) का समय: मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को सुबह लगभग 6:02 बजे से 8:33 बजे के बीच पारण करना शुभ माना जाता है। ध्यान रहे कि पारण एकादशी तिथि समाप्त होने और सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है।
संस्कृत शब्द "अजा" का अर्थ है "अजन्मा" या "शाश्वत"—यानी जो जन्म-मृत्यु के चक्र से परे है। यह नाम भगवान विष्णु के उसी अनंत और शाश्वत स्वरूप की ओर संकेत करता है। मान्यता है कि यह व्रत रखने से व्यक्ति के पुराने पापों और कर्मों का नाश होता है, इसीलिए इसे मोक्षदायिनी एकादशियों में गिना जाता है।
अजा एकादशी की कथा सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। कहा जाता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने जब भगवान श्रीकृष्ण से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में पूछा, तो श्रीकृष्ण ने उन्हें राजा हरिश्चंद्र की कहानी सुनाई। सत्य और धर्म की रक्षा के लिए ऋषि विश्वामित्र को दिए वचन को निभाते हुए राजा हरिश्चंद्र ने अपना पूरा राज्य त्याग दिया था। इसके बाद उन्हें अपनी पत्नी तारामती और पुत्र रोहिताश्व को भी बेचना पड़ा, और स्वयं उन्होंने काशी के श्मशान घाट पर चांडाल की सेवा स्वीकार की। कठिन समय में भी सत्य का साथ न छोड़ने वाले राजा हरिश्चंद्र को अंततः अजा एकादशी का व्रत रखने से उनके सारे कष्टों से मुक्ति मिली, ऐसा पुराणों में वर्णन मिलता है। यही कारण है कि यह व्रत सत्य, धैर्य और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक ग्रंथों जैसे ब्रह्मवैवर्त पुराण में अजा एकादशी का उल्लेख मिलता है, जहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इसका महत्व समझाया था। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से यह व्रत रखने पर व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है और उसके पुराने पापकर्मों से मुक्ति मिलती है। यही वजह है कि यह एकादशी विशेष रूप से मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति चाहने वाले भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अजा एकादशी 2026 इस बार 7 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी, जबकि तिथि की शुरुआत 6 सितंबर की शाम से ही हो जाएगी—इसी वजह से तारीख को लेकर असमंजस बना रहता है। सही व्रत विधि और नियमों का पालन कर इस पावन दिन भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। अपने शहर के अनुसार सटीक मुहूर्त जानने के लिए हमेशा स्थानीय पंचांग का संदर्भ अवश्य लें।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। सटीक समय क्षेत्र और शहर के अनुसार भिन्न हो सकता है।
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