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दैनिक राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेतों पर आधारित होता है और मुख्य रूप से राशि के आधार पर दिन की संभावित परिस्थितियों के बारे में जानकारी देता है। व्यक्तिगत और अधिक विस्तृत विश्लेषण के लिए जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर जन्म कुंडली का अध्ययन अधिक विशिष्ट माना जाता है।

जन्म कुंडली व्यक्ति की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के आधार पर तैयार की जाती है। इससे ग्रहों की स्थिति, राशि, लग्न, नक्षत्र, दशा और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे करियर, विवाह, धन और शिक्षा के बारे में ज्योतिषीय जानकारी प्राप्त की जाती है।

विवाह से पहले कुंडली मिलान पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में वर-वधू की कुंडलियों की संगति देखने के लिए किया जाता है। इसमें अष्टकूट गुण मिलान के साथ नाड़ी, भकूट और अन्य ज्योतिषीय कारकों का अध्ययन किया जा सकता है। इसे विवाह से जुड़े निर्णय में एक ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

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September 08, 2026

भौम प्रदोष व्रत 2026: 8 सितंबर मंगलवार को क्यों है यह दिन खास? जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस बार मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को पड़ रही है, और जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन आता है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है, खासकर उन भक्तों के लिए जो मंगल दोष, कर्ज या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं।

इसी दिन एक और खास संयोग बन रहा है — अजा एकादशी व्रत का पारण भी 8 सितंबर की सुबह ही किया जाएगा। यानी एकादशी का व्रत खोलते ही भक्त उसी दिन शिव-आराधना के एक और पावन अवसर से जुड़ जाएंगे।


तिथि और नक्षत्र


पंचांग के अनुसार 8 सितंबर 2026 को द्वादशी तिथि दोपहर करीब 2:43 बजे तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी। मंगलवार को त्रयोदशी पड़ने के कारण ही यह भौम प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा। दिन में शाम करीब 4:40 बजे तक पुष्य नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। पुष्य नक्षत्र को वैसे भी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।


भौम प्रदोष व्रत का महत्व


  • मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से मंगल दोष से पीड़ित जातकों के लिए लाभकारी माना जाता है।
  • यह व्रत रोग, ऋण (कर्ज) और शत्रु बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
  • भगवान शिव के साथ इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व है, क्योंकि मंगलवार हनुमान जी को समर्पित है।
  • प्रदोष काल — यानी सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय — शिव पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।



पूजा विधि


  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. दिनभर व्रत का संकल्प लें (फलाहार या निर्जल, अपनी क्षमता अनुसार)।
  3. शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें।
  4. "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
  5. आरती के बाद फलाहार ग्रहण कर व्रत का समापन करें।


अजा एकादशी पारण का समय


जिन भक्तों ने अजा एकादशी का व्रत रखा था, उनके लिए पारण (व्रत तोड़ने) का शुभ समय सुबह करीब 6:25 बजे से 8:53 बजे के बीच बताया जा रहा है। पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना शास्त्रसम्मत माना जाता है।


राहुकाल

मंगलवार को राहुकाल दोपहर लगभग 3:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।


एक और खास बात

8 सितंबर से जैन समुदाय के पर्युषण पर्व (चतुर्थी पक्ष) की भी शुरुआत हो रही है, जबकि पंचमी पक्ष का पर्युषण 9 सितंबर से आरंभ होगा। इस तरह यह दिन कई परंपराओं के लिए एक साथ महत्वपूर्ण बन गया है।

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यह जानकारी सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। सटीक मुहूर्त और तिथि अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से अवश्य जांच लें।

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